मधुमक्खी पालन की वैज्ञानिक पद्धति
यह पुस्तक कई व्यक्तियों के सहयोग का फल है, जिस प्रकार मधुमक्खी परिवार के कुछ बड़े सदस्य बाहर से पुष्परस (मकरंद) व पराग एकत्र करके मधुपेटिका में एकत्र करते है। कुछ छोटे सदस्य अपने पंखो से हवा उत्पन्न करके मकरंद को शहद में परिवर्तित करतीं है, कुछ छोटे बच्चों की देख-भाल के साथ ही साथ घर की साफ-सफाई के कार्यों में लगी रहती है। उसी प्रकार डॉ. चंचल सिंह ने कई पाठ्य सामग्रियों, पुस्तकों व अपने अनुभवों से अर्जित ज्ञान का समावेश करते हुये, इस पुस्तक को लिखा है। पुस्तक को लिपिबद्ध करने में श्री कमल नारायण बाजपेई, लिपिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, बाँदा, प्रसार निदेशालय, बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा द्वारा तकनीकी सहयोग प्रदान किया जया है। जहाँ इस पुस्तक के सैद्धांतिक अध्यायों का अवलोकन डॉ. बी.के. सिंह, प्राध्यापक, कीट विज्ञान विभाग, बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा द्वारा करते हुये अपने ज्ञान और अनुभवों को इस पुस्तक में सम्मलित किया गया है। वहीं डॉ. ए.के. सिंह, सह-प्राध्यापक, कीट विज्ञान विभाग, रानी लक्ष्मी बाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी द्वारा इस पुस्तक के व्यावहारिक ज्ञान के अध्यायों का अवलोकन कर अपने अनुभवों को साझा किया है। सम्पूर्ण पुस्तक का पुनरावलोकन डॉ. एन. के. बाजपेई, निदेशक प्रसार, बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा द्वारा किया गया है। डॉ. एस. वी. एस. राजू, माननीय कुलपति, बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा मुख्य संरक्षक के रूप में अपना योगदान प्रदान किए है।
सम्पादक